फिरोजशाह तुगलक(1351 ई.-1388 ई.) – Firoz Shah Tughlaq History in Hindi

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फिरोजशाह तुगलक(1351 ई.-1388 ई.) – Firoz Shah Tughlaq History in Hindi
फिरोजशाह तुगलक(1351 ई.-1388 ई.) – Firoz Shah Tughlaq History in Hindi

फिरोजशाह तुगलक(1351 ई.-1388 ई.) – Firoz Shah Tughlaq History in Hindi

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फिरोजशाह तुगलक (1351 ई.-1388 ई.)

  •  फिरोजशाह तुगलक का जन्म 1309 ई. में हुआ था। उसके पिता का नाम मलिक रजब था। गियासुद्दीन तुगलक ने अपने भाई की मृत्यु के पश्चात फिरोज की देखभाल की गया। मुहम्मद तुगलक ने भी इसका विशेष ध्यान रखा। उसे राजनीति एवं प्रशासन की समुचित शिक्षा प्रदान किया गया। उसे अमीर-ए-हाजिब के पद पर नियुक्त किया गया। इस पर रहते हुए उसने सुल्तान मुहम्मद तुगलक की सेवा कर उनका विश्वास प्राप्त कर लिया।
  • उलेमा के सहयोग से 22 मार्च, 1351 को थट्टा में ही फिरोज का राज्याभिषेक संपन्न हुआ। खुदाबंदजादा ने भी यह निर्णय स्वीकार कर लिया।
  • वह एक उदार शासक था और उसने उलेमा वर्ग की सलाह मानते हुए धार्मिक आधार पर एक इस्लामिक राज्य की स्थापना की थी।
  • हिंदुओं को जिम्मी की संज्ञा दी गई। अब ब्राह्मणों को भी जजिया देने को बाध्य किया गया। हिंदुओं के अनेक मंदिर नष्ट कर दिए गए, मंदिरों की मरम्मत पर पाबंदी लगा दी गई।
  • राज्य ने मुख्यतः कर-खराज (भूमि कर), जकात (मुस्लिमों से), जजिया कर (गैर मुस्लिमों से) और खुगस (युद्ध में लूट का माल) वसूले गये।
  • सिंचाई की सुविधा के लिए अनेक नहरों का निर्माण हुआ इसमें नहरें प्रमुख थी।
    1. यमुना नदी से हिसार तक 150 मील लंबी अलूगखनी-नहर।
    2. सतलज से घग्घर तक 96 मील लंबी रजबहा-नहर।
    3. सिरमौर से हांसी तक की नहर।
    4. घग्घर से फिरोजाबाद तक की नहर।
    5. यमुना से फिरोजाबाद तक की नहर।
  • द्वितीय अभियान के बाद जौनपुर नगर की स्थापना की गई तथा फतह खां को
    सुल्तान ने अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। सिक्खों में अपने नाम के साथ फतह खां का नाम भी खुदवाया।
  • उलेमा का समर्थन एवं प्रशंसा पाने के उद्देश्य से फिरोज ने पुरी एवं वहां स्थित जगन्नाथ के मंदिर को लूटा व मंदिर की मूर्ति समुद्र में फेंक दी गई। बाध्य होकर जाजनगर के राजा ने सुल्तान की अधीनता स्वीकार कर ली। वह प्रतिवर्ष कर के रूप में कुद हाथी देने पर सहमत हो गया। जाजनगर के बाद वीरभूमि के हिंदू-राजा और अनेक सामंतों को पराजित करता हुआ, उनसे अपनी अधीनता स्वीकार करवाता हुआ सुल्तान दिल्ली लौट गया।
  • फिरोजशाह, सैनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से पूरी तरह असफल सिद्ध हुआ।
  • उसने सेना में वंशवाद को बढ़ावा दिया तथा सैनिकों को वेतन के रूप में भूमि प्रदान की। उसके शासन काल में सेना में भ्रष्टाचार फैल चुका था।
  • फिरोजशाह अपने आर्थिक व प्रशासनिक सुधारों के कारण सल्तनत काल का अकबर कहलाता था।
  •  फिरोजशाह ने हिसारफिरोजाबादफतेहाबादफिरोजशाह कोटला, जौनपुर नगरों की स्थापना की थी।
  • उसने नहरों, अस्पतालों मस्जिदों तथा गुम्बदों का निर्माण करवाया था।
  • उसने आकाशीय बिजली से ध्वस्त हुई कुतुबमीनार की 5वीं मंजिल का पुनर्निमाण करवाया। वह मेरठ तथा टोपरा (अम्बाला) स्थित अशोक स्तम्भों को दिल्ली ले गया तथा फिर अपनी नयी राजधानी फिरोजाबाद में उन्ह स्थापित किया।
  • उसने दासों के लिए एक नये विभाग दीवान-ए-बंदगान की स्थापना की (उसके पास 1,80,000 गुलाम) थी।
  • उसने निर्धन महिलाओं एवं बच्चों की आर्थिक सहायता के लिए ‘दीवान-ए-खैरात नामक दान विभाग की स्थापना की।
  • उसने निर्धन वर्ग के निःशुल्क चिकित्सा हेतु एक खैराती अस्पताल दारुल-शफा की स्थापना की।
  • इसके अलावा फिरोजशाह तुगलक ने मैरिज ब्यूरो, लोक निर्माण विभाग तथा रोजगार कार्यालय की स्थापना की थी।
  • फिरोजशाह ने दो नये सिक्के अधा (जीतल का 50%) तथा बिख (जीतल का 25%) चलाये थे। उसने फारसी भाषा में अपनी आत्मकथा फुतुहात-ए-फिरोजशाही’ की रचना की थी।
  •  प्रसिद्ध इतिहासकार बरनी उसका दरबारी था उसने तारीख -ए-फिरोजशाही तथा ‘फतवा-ए-जहाँदारी नामक प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं।
  • 1388 ई. में फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु के बाद तुगलक वंश लगभग समाप्त हो गया क्योंकि उसके बाद के शासक अयोग्य थे।
  • 1360 ई. सुल्तान का आक्रमण नगरकोट पर हुआ जिसपर मुहम्मद तुगलक ने भी आक्रमण किया था। मुहम्मद के समय में नगरकोट के राजा ने दिल्ली की अधीनता स्वीकार कर ली थी।

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