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Internet Book PDF in Hindi Download (Internet Ka Yug Hindi E-Book)

Internet Book PDF in Hindi
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Internet Book PDF in Hindi Download (Internet Ka Yug Hindi E-Book)

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Internet Kya hai


इंटरनेट विश्व की सबसे अधिक सक्षम सूचना प्रणाली है। 135 देशों में इसके 30,000 से भी अधिक नेटवर्क हैं। वर्ष 1990 तक 5,00,000 कम्प्यूटर इंटरनेट नेटवर्क के जरिए जुडे हुए थे। वर्ष 1995 तक यह संख्या बढ़कर 48 करोड़, 1998 में 50 करोड़ और वर्ष 2001 के अंत तक यह संख्या लगभग 200 करोड़ हो गयी है। वास्तव में इंटरनेट सूचनाओं का सागर है। समस्त भूमंडल में छोटे – छोटे नेटवर्कों में फैली सूचनाओं का संघटक है। इसके जरिए किसी भी विषय जैसे वाणिज्य, शिक्षा, विज्ञान, रोजगार, मनोरंजन आदि पर सफलता से जानकारिया प्राप्त की जा सकती है। सामान की खरीद फरोख्त, व्यापार संबंधी विज्ञापन सृजनात्मक प्रस्तुतीकरण जैसे कार्यों में इंटरनेट का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है।

Internet Book PDF


इंटरनेट की शुरूआत सन् 1969 में अमरीकी प्रतिरक्षा मंत्रालय की एक अनुसंधान परियोजना के रूप में हुई। अमरीकी प्रतिरक्षा विभाग की एक एजेन्सी एडवान्स्ड रिसर्च प्रोजेक्ट एजेन्सी (ARPA) की देन आर्पानेट (ARPANET) ही इन्टरनेट के विकास की प्रथम सीढ़ी थी। इसका विकास अनुसंधान संस्थानों के आर्थिक अंश दाताओं के मध्य कम्प्यूटर संसाधनों के उपयोगी आदान – प्रदान हेतु किया गया था। इसका दूसरा उद्देश्य न्यूक्लिअर मिसाइलों के हमले के कारण सम्पूर्ण सूचना तंत्र को नष्ट होने से बचाया भी था। क्यूबा संकट के फौरन बाद अमरीका ने महसूस किया कि परमाणू हमले के खतरे से वह सुरक्षित नहीं है।

Internet की सूचना सप्रेषण की विशिष्ट पद्धति तथा महाशक्तियों के बीच चले शीत युद्ध उत्प्रेरक का कार्य किया और परमाणु हमला होने की स्थिति में जरा भी प्रभावित न होने देने के लिए विश्वसनीय संचार तथा इस तरह से रूस और अमरीका के बीच चले शीत युद्ध की देन मेन्य उपयोग के लिए की गई एक शुरुआत 25 वर्ष से भी कम का माध्यम बन गयी।

इंटरनेट हजारों लाखों स्वतंत्र नेटवर्कों का ऐसा संयुक्त नेटवर्क है, जिसमें प्रत्येक नेटवर्क एक ऐसे माध्यम से जुड़ा है, जिसकी सहायता से यह अन्य नेटवर्क से सूचनाओं का आदान – प्रदान करता है।

भारत सरकार के उपक्रम VSNL विदेश संचार निगम लिमिटेड ने 15 अगस्त 1995 में व्यावसायिक रूप में प्रथम इंटरनेट सेवा प्रदान की।

नई दिल्ली स्थित नेशनल इंफोरमेशन सेन्टर (NIC) भारत में इंटरनेट कनेक्शन प्रयोग करने वाला प्रथम संस्थान था।

Internet की सेवाएं
समान्यताः इंटरनेट प्रयोक्ता केवल वर्ल्डवाइड वेब को ही इंटरनेट का एक मात्र संसाधन समझता है।

इंटरनेट सर्फिंग – आज इंटरनेट के महत्त्व के कारण बहुत अधिक संख्या में इंटरनेट वेबसाइटों का निर्माण हो चुका है।

सर्च इंजन – असंख्य पृष्ठों वाली सामग्री में से आपकी मनचाही सामग्री या विषय वस्तु वाला पृष्ठ ढूंढकर सामने ले आने जैसे कार्य को पलभर में कर देने कार्य इंटरनेट के सर्च इंजन द्वारा किया जाता है।

स्पाइडर – स्पाइडर ऐसे प्रोग्राम हैं जिन्हें डेटा बेस में सूची बध्द वेब पेज की देखरेख के लिए निर्मित किया गया है।
URL (Uniform Resource Locator) को ही स्टोर किया जाता है। बल्कि उनकी आवृत्ति आदि की भी स्टोर कर लिया जाता है और इसी के आधार पर इंजन इन शब्दों को महत्व प्रदान करके परिणाम सूची में उन्हें वरियता से स्थान प्रदान करता है।

ब्राउसर – ऐसे सॉफ्टवेयर जो वेब साइट को ढूँढने में काम आते हैं ब्राउसर कहलाते हैं। प्रमुख ब्राउसर हैं – माइक्रोसॉफ्ट इन्टरनेट एक्सप्लोरर, नेटस्केप नेवीगेटर आदि।

World Wide Web (www) – आज जब व्यक्ति इंटरनेट सर्फिंग की बात करता है तो इसका अर्थ यह होता है कि वह ग्लोब (वर्ल्ड) भर में स्थित मल्टीमीडिया हाइपर लिंक डेटा बेस से भरी हुई साइट्स को चैक करेगा तो इन साइट्स के सम्पूर्ण जाल को जहाँ कि आज कल प्रति मिनट एक नई वेबसाइट उभर कर आ जाती है। www कहा जाता है।

Internet Explorer – यह एक ग्राफिक, वेब ब्राउसर है। यह एक सॉफ्टवेयर है जो इसमें इंटरनेट प्रयोग करने का प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाता है वह हमें इंटरनेट से सम्पर्क स्थापित करने में मदद करता है।

फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल – फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल का उपयोग एक कम्प्यूटर नेटवर्क से किसी दूसरी कम्प्यूटर नेटवर्क में फाइलों को ट्रांसफर (भेजने) करने के लिए किया जाता है।

गोफर – गोफर का अविष्कार अमेरिका के मिनिसोटा नाम विश्वविद्यालय में हुआ था। यह एक यूजर फ्रेंडली इंटरफेस है जिसके माध्यम से गूजर इंटरनेट पर प्रोग्राम तथा सूचनाओं का आदान – प्रदान कर सकता है।

टेलनेट – डाटा के हस्तान्तरण के लिए टेलनेट का प्रयोग किया जाता है। इस प्रोटोकॉल के द्वारा यूजर को रिमोट कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है।

यूजनेट – विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को एकत्र करने के लिए इंटरनेट के नेटवर्क यूजनेट का प्रयोग किया जाता है। इस नेटवर्क के माध्यम से कोई भी यूजर विभिन्न समूहों से अपने लिए आवश्यक सूचनाएं एकत्र कर सकता है।

वैरोनिका – वैरोनिका प्रोटोकॉल गोफर के माध्यम से कार्य करता है। यूजर गोफर तथा वेरोनिको का एक साथ प्रयोग करके किसी भी डाटा बेस तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

आर्ची – फाइल ट्रांसफर पोटोकॉल (F. T. P.) में स्टोर फाइल को खोजने के लिए आर्ची का प्रयोग किया जाता है।

Home Page : वेबसाइट का मुख्य पृष्ठ जो कि वेबसाइट Open करते वक्त सर्वप्रथम खुलता है तथा इस पर सूचना की हैडिंग लिखी होती है। तथा उसे अन्य पेज हाइपरलिंक के माध्मय से जुडे रहते हैं, होमपेज कहलाता है।

HTML : हाइपर टेक्स मार्कअप लेंग्वेज इसकी मदद से वेब पेजों को डिजाइन किया जाता है। आज कल JAVA भाषा का प्रयोग भी वेबसाइट डवलेपमेंट के लिए होता है।

E- Mail (Electronic Mail) : इमेल कम्प्यूटर के द्वारा भेजी जा सकने वाली इलैक्ट्रानिक डाक सेवा का संक्षिप्त रूप है। सर्वप्रथम ई- मेल सेवा www.hotmail.com ने शुरू की। इसे एक भारतीय सबीर भाटिया ने विकसित किया था जिसे बाद में माइक्रोसॉफ्ट ने खरीद लिया।

E-mail Address : प्रत्येक इंटरनेट साइट जो कि ई-मेल सुविधा प्रदान करती है, प्रत्येक यूजर को एक एड्रेस देती है। जिसमें यूजर का नाम तथा साइट का नाम होता है। ईमेल कहलाता है। जैसे – dubeydharma@hotmail.com यहां dubeydharma यूजर नेम है तथा hotmail साइट का नाम इन दोनों को अलग – अलग करने के लिए @ (एट द रेट) चिह्न का उपयोग होता है।

Mail Box : प्रत्येक साइट जो ई- मेल ए़ड्रेस देती है वह अपनी वेबसाइट में कुछ kb या mb का स्पेस इस यूजर के लिए रिजर्व करती है। इसे मेल बॉक्स कहते हैं। तथा यहीं से वह किसी अन्य को डाक Compose करके भेजता है।

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Anjali Yadav

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